भारत में मशीन लर्निंग की प्रगति

भारत का डिजिटल और तकनीकी परिदृश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के समावेश से एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। देश अपने मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे यूपीआई और डिजिटल पहचान प्रणालियों का लाभ उठाकर सार्वजनिक कल्याण के लिए एआई आधारित समाधान विकसित कर रहा है।

प्रमुख विकास क्षेत्र निम्न प्रकार हैं:

  • क्षेत्रीय विविधताओं के अनुकूल स्वदेशी डेटासेट का निर्माण।
  • सरकारी सेवाओं के वितरण में स्वचालित तकनीकों का एकीकरण।
  • भारतीय उद्यमों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा एआई नवाचार में निवेश।

इंडियाएआई मिशन और कंप्यूटिंग अवसंरचना

तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने व्यापक इंडियाएआई मिशन शुरू किया है। इस नीतिगत पहल का मुख्य उद्देश्य उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे का निर्माण करना, शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को सहायता देना और शोधकर्ताओं के लिए ओपन-सोर्स डेटा उपलब्ध कराना है।

ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) तक सुलभ पहुंच प्रदान करके यह योजना भारतीय डेवलपर्स और अकादमिक संस्थानों को बड़े एआई मॉडल प्रशिक्षित करने में सक्षम बनाती है। इसके साथ ही जिम्मेदार एआई और डेटा सुरक्षा मानकों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में परिवर्तन

मशीन लर्निंग का प्रभाव भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है:

  1. स्वास्थ्य सेवा: कंप्यूटर विज़न एल्गोरिदम दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों को टीबी, मधुमेह से होने वाली आंखों की बीमारियों और हृदय संबंधी समस्याओं का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद कर रहे हैं।
  2. कृषि क्षेत्र: उपग्रह डेटा और मौसम आधारित मशीन लर्निंग मॉडल किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता, कीट नियंत्रण और फसल कटाई के सही समय की सटीक जानकारी देते हैं।
  3. रसद प्रबंधन: स्वचालित आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली फसलों के नुकसान को कम करने और बाजार मांग का पूर्वानुमान लगाने में सहायक साबित हो रही है।

भाषिणी परियोजना से भाषाई समावेशिता

भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने भाषिणी डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। यह मंच मशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग तकनीकों का उपयोग करता है।

भाषिणी के माध्यम से विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद और वॉयस-आधारित सेवाएं संभव हुई हैं। इससे गैर-अंग्रेजी भाषी क्षेत्रों के नागरिक भी अपनी मातृभाषा में डिजिटल सरकारी सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।